उत्तर प्रदेश

केजीएमयू में दवा घोटाले पर बड़ी कार्रवाई: विभागाध्यक्ष हटाए गए, 2.5 करोड़ के गबन का आरोप

लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के यूरॉलॉजी विभाग में दवाओं से जुड़े कथित घोटाले पर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की गई है। जांच में शुरुआती अनियमितताएं सामने आने के बाद कुलपति प्रो. सोनिया नित्यानंद ने सख्त कदम उठाते हुए विभागाध्यक्ष प्रो. अपुल गोयल को उनके पद से हटा दिया है।

जांच रिपोर्ट के बाद तेज हुई कार्रवाई

प्रारंभिक जांच रिपोर्ट मिलते ही यह कार्रवाई की गई। जांच के आठवें दिन विभाग में प्रशासनिक बदलाव किया गया और तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। साथ ही उनसे वसूली की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

करोड़ों के दवा घोटाले का शक

प्रशासन के अनुसार, “असाध्य योजना” के तहत दुर्लभ बीमारियों के लिए मिलने वाली महंगी दवाओं की खरीद में गड़बड़ी सामने आई है। जहां पहले हर महीने लगभग 10 लाख रुपये की दवाएं खरीदी जाती थीं, वहीं हाल के महीनों में यह खर्च बढ़कर 45 लाख रुपये तक पहुंच गया।

प्रारंभिक जांच में करीब 2.50 करोड़ रुपये की दवाओं के दुरुपयोग और गबन की आशंका जताई गई है।

फर्जीवाड़े का तरीका

जांच में सामने आया कि कुछ मरीजों के नाम पर बार-बार भर्ती दिखाकर दवाएं निकाली जाती थीं। फर्जी ओपीडी पर्चियों और गलत रिकॉर्ड के जरिए महंगी दवाओं का इंडेंट तैयार किया जाता था, जिन्हें बाद में मरीजों को दिए बिना बाहर बेच दिया जाता था।

कर्मचारियों पर कार्रवाई

घोटाले में शामिल तीन आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि एक नियमित फार्मासिस्ट को निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

नया विभागाध्यक्ष नियुक्त

विभाग के संचालन के लिए जनरल सर्जरी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक प्रो. एचएस पाहवा को यूरॉलॉजी विभाग का कार्यवाहक प्रमुख नियुक्त किया गया है।

प्रशासन की सख्ती जारी

केजीएमयू प्रशासन का कहना है कि मामले की गहन जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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