UP में अफसरों की मनमानी? अलीगढ़ में मंत्री की कॉल इग्नोर, जांच के आदेश

उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में अफसरशाही और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला तब चर्चा में आया जब राजस्व राज्य मंत्री सुरेंद्र दिलेर की कॉल तहसील कोल के तहसीलदार द्वारा नहीं उठाई गई। इस घटना के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल मच गई है।
जानकारी के अनुसार, मंत्री सुरेंद्र दिलेर ने फरियादियों की समस्याएं सुनने के बाद तहसील कोल के तहसीलदार को अपने मोबाइल नंबर से फोन किया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं की गई। इसके बाद मंत्री ने मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की, जिसके बाद जिला प्रशासन ने संज्ञान लेते हुए जांच शुरू कर दी है।
डीएम ने तहसीलदार से मांगा जवाब
मामले को गंभीरता से लेते हुए अलीगढ़ के जिलाधिकारी (DM) ने संबंधित तहसीलदार से जवाब तलब किया है और पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं। इस घटना ने प्रशासनिक कार्यशैली और जनप्रतिनिधियों के प्रति अफसरों के व्यवहार पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एसडीएम इगलास पर भी लगे आरोप
इसी बीच उपजिलाधिकारी (SDM) इगलास पर भी गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि एसडीएम का सीयूजी नंबर अक्सर स्विच ऑफ रहता है या फिर कॉल रिसीव नहीं की जाती। आरोप है कि फरियादियों को लगातार दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और उनकी समस्याओं का समाधान समय पर नहीं हो रहा है।
जनता की शिकायतें और बढ़ती नाराजगी
इगलास क्षेत्र में प्रतिदिन बड़ी संख्या में फरियादी अपनी समस्याएं लेकर तहसील और एसडीएम कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन कई बार उन्हें निराश लौटना पड़ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की उदासीनता के कारण लोगों को न्याय मिलने में देरी हो रही है।
स्थानीय लोगों ने इस मुद्दे को लेकर जिला प्रशासन से कई बार शिकायत भी की है।
‘सीयूजी नंबर बना खिलौना’ जैसे आरोप
लोगों का कहना है कि अधिकारियों को दिए गए सीयूजी नंबर का उपयोग जनता से संवाद के लिए होना चाहिए, लेकिन कई बार इन नंबरों पर संपर्क नहीं हो पाता। इसी वजह से प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रशासनिक कार्यशैली पर उठे सवाल
मामले को लेकर जनसूचना निदेशक संदीप सिंह से बातचीत में उन्होंने संबंधित अधिकारियों से चर्चा करने की बात कही है। फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच जारी है।
अलीगढ़ में सामने आए इस मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक जवाबदेही और जनता से जुड़े संवाद तंत्र पर बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि जांच के बाद क्या कार्रवाई होती है और क्या व्यवस्था में सुधार हो पाता है या नहीं।



