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प्रेमानंद महाराज का वीडियो साझा कर दिग्विजय सिंह ने पूछा— सनातन धर्म में शूद्रों का क्या स्थान?

नई दिल्ली। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने सनातन धर्म को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। उन्होंने आध्यात्मिक गुरु स्वामी प्रेमानंद महाराज का एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करते हुए सनातन धर्म, वर्ण व्यवस्था और जन्म आधारित भेदभाव को लेकर सवाल उठाए हैं।

दिग्विजय सिंह ने पोस्ट में लिखा कि वह यह समझना चाहते हैं कि सनातन धर्म वास्तव में क्या है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सनातन धर्म में शूद्र परिवार में जन्मे लोगों के लिए कोई स्थान है? इसके साथ ही उन्होंने वर्ण व्यवस्था को लेकर भी प्रश्न उठाया।

दिग्विजय सिंह ने वर्ण व्यवस्था पर उठाए सवाल

दिग्विजय सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उनकी समझ के अनुसार सनातन धर्म का मूल भाव यह है कि हम सब एक हैं और सबका मालिक एक है। उन्होंने कहा कि वर्ण व्यवस्था जन्म से नहीं, कर्म से होती है

उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई उनसे असहमत है तो यह बताया जाए कि सनातन धर्म के किस वेद, उपनिषद या किसी मान्य ग्रंथ में वर्ण को जन्म से निर्धारित किया गया है। दिग्विजय सिंह ने यह भी लिखा कि यदि कोई उन्हें इस विषय पर ज्ञान देना चाहता है तो वह अवश्य दें।

प्रेमानंद महाराज ने सनातन धर्म पर क्या कहा?

स्वामी प्रेमानंद महाराज ने वीडियो में सनातन धर्म को शाश्वत और ब्रह्म स्वरूप बताया। उन्होंने कहा कि जैसे ब्रह्म का कोई पूर्ण वर्णन नहीं कर सकता, वैसे ही सनातन धर्म की कोई तिथि या आरंभिक समय नहीं बताया जा सकता।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस तरह माया या सृष्टि की उत्पत्ति की कोई निश्चित तिथि वेदों, पुराणों या संत साहित्य में नहीं मिलती, उसी तरह सनातन धर्म भी अनादि और अनंत है

प्रेमानंद महाराज ने कहा कि सनातन धर्म ब्रह्म धर्म है, जो वेद, पृथ्वी, आकाश, वायु, अग्नि और समस्त चराचर जगत में व्याप्त है। इसलिए इसका कोई लिखित आरंभ नहीं है और न ही इसे किसी तिथि या कालखंड में बांधा जा सकता।

सोशल मीडिया पर तेज हुई बहस

दिग्विजय सिंह की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर सनातन धर्म, वर्ण व्यवस्था और धार्मिक दर्शन को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है। समर्थक और विरोधी दोनों ही पक्ष अपने-अपने तर्क रख रहे हैं।

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