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महिला आरक्षण और परिसीमन पर सियासी घमासान, स्पेशल सत्र से पहले सोनिया गांधी ने सरकार को घेरा

संसद के आगामी तीन दिवसीय स्पेशल सत्र से पहले Sonia Gandhi ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। यह सत्र Women Reservation Act में प्रस्तावित संशोधनों और उससे जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए बुलाया गया है, लेकिन इसकी टाइमिंग को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है।

“असली मुद्दा महिला आरक्षण नहीं, परिसीमन है”

एक अखबार में लिखे लेख में सोनिया गांधी ने कहा कि महिला आरक्षण मुद्दा नहीं है, असली बहस का केंद्र Delimitation है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस प्रक्रिया को जल्दबाजी में आगे बढ़ा रही है, जबकि इसके पीछे राजनीतिक मकसद छिपा हो सकता है।

स्पेशल सत्र की टाइमिंग पर सवाल

सोनिया गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ऐसे समय में विधेयक पारित कराना चाहते हैं जब Tamil Nadu और West Bengal में चुनावी माहौल चरम पर है। उन्होंने इसे विपक्ष को बचाव की मुद्रा में लाने की रणनीति बताया।

संघीय ढांचे पर खतरे की आशंका

कांग्रेस नेता ने चेतावनी दी कि परिसीमन की प्रक्रिया से देश के संघीय ढांचे पर असर पड़ सकता है और दक्षिणी राज्यों को राजनीतिक नुकसान होने की आशंका है। उन्होंने कहा कि किसी भी संवैधानिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और संतुलन बेहद जरूरी है।

जनगणना और आरक्षण पर भी टिप्पणी

उन्होंने कहा कि जनगणना में देरी के कारण कई लोग सरकारी लाभों से वंचित रह गए। साथ ही उन्होंने सवाल उठाया कि जब महिला आरक्षण कानून पहले ही पारित हो चुका है, तो इसे लागू करने में देरी क्यों की जा रही है और अब इसे 2029 से लागू करने की बात क्यों की जा रही है।

“नीति नहीं, नैरेटिव सेट किया जा रहा है”

सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार का असली फोकस महिला आरक्षण से ज्यादा परिसीमन और जातिगत जनगणना जैसे मुद्दों पर राजनीतिक नैरेटिव तैयार करना है।


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