यूपी में किसानों के लिए पर्याप्त उर्वरक उपलब्ध, सरकार ने जारी की नई व्यवस्था और खरीद नियम

उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के लिए रासायनिक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता की जानकारी दी है। कृषि विभाग के अनुसार प्रदेश में वर्तमान में कुल 27.94 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3.13 लाख मीट्रिक टन अधिक है।
प्रदेश में कितनी उर्वरक उपलब्ध है?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार उर्वरक की उपलब्धता इस प्रकार है:
- यूरिया: 13.28 लाख मीट्रिक टन
- डीएपी: 5.23 लाख मीट्रिक टन
- एनपीके: 4.81 लाख मीट्रिक टन
- एसएसपी: 3.69 लाख मीट्रिक टन
- एमओपी: 0.93 लाख मीट्रिक टन
कुल मिलाकर राज्य में किसानों के लिए पर्याप्त भंडार मौजूद है और आगामी खरीफ सीजन की मांग को देखते हुए लगातार आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
सरकार की तैयारी और सप्लाई व्यवस्था
कृषि विभाग उत्तर प्रदेश ने बताया कि भारत सरकार के सहयोग से लगातार उर्वरकों का आवंटन और आपूर्ति की जा रही है। उद्देश्य यह है कि किसानों को समय पर और उनकी जरूरत के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जा सके।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय की निगरानी में सप्लाई चेन को मजबूत किया जा रहा है ताकि किसी भी क्षेत्र में कमी न हो।
फर्जी बिक्री और दुरुपयोग रोकने के लिए नई व्यवस्था
सरकार ने अनुदानित उर्वरकों के दुरुपयोग को रोकने के लिए बड़ा निर्णय लिया है। अब उर्वरक केवल उन्हीं किसानों को बेचा जाएगा जिनके पास:
- किसान पहचान पत्र (फार्मर आईडी)
- भूमि रिकॉर्ड (खतौनी)
इन दस्तावेजों के आधार पर ही बिक्री की जाएगी।
इसके अलावा उर्वरकों के साथ किसी अन्य उत्पाद की अनिवार्य टैगिंग को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
किसानों के लिए सरकार की सलाह
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे:
- अपनी फसल के अनुसार वैज्ञानिक सलाह के आधार पर उर्वरक लें
- अनावश्यक भंडारण से बचें
- संतुलित मात्रा में ही उर्वरक का उपयोग करें
सरकार ने यह भी बताया कि अत्यधिक उर्वरक खरीदने से न केवल लागत बढ़ती है, बल्कि जमीन की गुणवत्ता पर भी असर पड़ सकता है।
प्रति हेक्टेयर कितनी सीमा तय?
सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार:
- डीएपी: अधिकतम 5 बोरी प्रति हेक्टेयर
- यूरिया: अधिकतम 7 बोरी प्रति हेक्टेयर
यह सीमा फसल और भूमि की आवश्यकता के अनुसार तय की गई है।
क्यों जरूरी है संतुलित उपयोग?
विशेषज्ञों के अनुसार अत्यधिक उर्वरक उपयोग से:
- मिट्टी की उर्वरता घट सकती है
- उत्पादन लागत बढ़ती है
- फसल की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है
इसलिए सरकार किसानों को संतुलित और वैज्ञानिक तरीके से उर्वरक उपयोग करने के लिए लगातार जागरूक कर रही है।




