‘कितना भी जोर लगा लो, प्रधान ही प्रशासक रहेंगे’, अखिलेश यादव पर ओपी राजभर का तीखा हमला

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के योगी सरकार के फैसले पर सियासत तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी द्वारा इस निर्णय का विरोध किए जाने के बाद प्रदेश सरकार में पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है।
राजभर ने साफ शब्दों में कहा कि विपक्ष चाहे जितनी कोशिश कर ले, लेकिन ग्राम प्रधान ही प्रशासक बने रहेंगे। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में समाजवादी पार्टी पंचायत चुनाव तक नहीं जीत पाएगी।
‘प्रधान ही प्रशासक रहेंगे’
कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, “ए… अखिलेश यादव जी, कितना भी तीन-तिकड़म लगा लीजिए, प्रधान जी ही प्रधान (प्रशासक) रहेंगे। विधानसभा तो क्या अब आप लोग पंचायत चुनाव भी नहीं जीत पाएंगे।”
राजभर ने अपने पोस्ट में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं पर भी तंज कसते हुए कई राजनीतिक टिप्पणियां कीं और दावा किया कि प्रदेश की जनता अब सपा की राजनीति को समझ चुकी है।
अखिलेश यादव पर साधा निशाना
ओपी राजभर ने अपने बयान में कहा कि उत्तर प्रदेश के गैर-यादव पिछड़े और दलित समाज ने मन बना लिया है कि आने वाले पंचायत और विधानसभा चुनावों में समाजवादी पार्टी को समर्थन नहीं मिलेगा।
उन्होंने आरोप लगाया कि सपा नेतृत्व वर्तमान राजनीतिक मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। राजभर ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार कानून-व्यवस्था और विकास के मुद्दों पर मजबूती से काम कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, उत्तर प्रदेश की ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो गया है। पंचायत चुनाव में देरी को देखते हुए राज्य सरकार ने आदेश जारी कर निवर्तमान ग्राम प्रधानों को अपने-अपने गांव का प्रशासक नियुक्त करने का निर्णय लिया है।
सरकार का कहना है कि नए चुनाव होने तक गांवों में विकास कार्य और प्रशासनिक गतिविधियां प्रभावित न हों, इसलिए यह व्यवस्था लागू की गई है।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
योगी सरकार के इस फैसले को लेकर विवाद भी खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ बताते हुए सवाल उठाए हैं। वहीं इस आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती भी दी गई है, जहां मामले की सुनवाई होने की संभावना है।
पंचायत चुनाव से पहले बढ़ा राजनीतिक तापमान
ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के मुद्दे ने पंचायत चुनाव से पहले प्रदेश की राजनीति को गर्मा दिया है। एक तरफ सरकार इसे प्रशासनिक आवश्यकता बता रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश के रूप में पेश कर रहा है।
आने वाले दिनों में हाईकोर्ट की सुनवाई और पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन सकता है।



