महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में आरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट की नोटिस

महिलाओं को लोकसभा और विधानसभाओं में 33% राजनीतिक आरक्षण देने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने दोनों से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार ने 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम (106वां संविधान संशोधन) के जरिए महिलाओं को आरक्षण देने की घोषणा तो की थी, लेकिन इसे नई जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने तक टाल दिया गया है। इस शर्त को अदालत में चुनौती दी गई है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम क्या है?
साल 2023 में पारित यह अधिनियम भारतीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम माना गया।
इस कानून के तहत —
- लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
- दिल्ली विधानसभा में भी 33% आरक्षण का प्रावधान किया गया है।
- एससी और एसटी वर्गों की आरक्षित सीटों में से भी एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिए सुरक्षित होंगी।
- यह आरक्षण 15 वर्षों की अवधि के लिए लागू रहेगा, जिसे संसद आगे बढ़ा सकती है।
इस संशोधन से संविधान के अनुच्छेद 330A, 332A, 334A और 239AA में बदलाव किए गए हैं।
सरकार की दलील
केंद्र का कहना है कि महिला आरक्षण नई जनगणना और परिसीमन के बाद लागू किया जाएगा ताकि जनसंख्या के आधार पर सीटों का न्यायसंगत पुनर्वितरण किया जा सके।



