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इंग्लैंड में भारतीय परिवारों में बेटों की चाहत में भ्रूण हत्या का मामला: रिपोर्ट में खुलासा

इंग्लैंड और वेल्स में भारतीय मूल के कुछ परिवारों में बेटों की चाहत के कारण बेटियों के भ्रूण को समाप्त करने की प्रवृत्ति सामने आई है। हेल्थ इम्प्रूवमेंट एंड डिस्पैरिटीज द्वारा 2017 से 2021 तक के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया, जिसमें यह देखा गया कि तीन या उससे अधिक बच्चों वाले भारतीय परिवारों में जन्म का लिंग अनुपात 100 लड़कियों पर 113 लड़कों था, जो सामान्य सीमा 107 से अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि लिंग-चयनात्मक गर्भपात किए जा रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 5 साल में इंग्लैंड और वेल्स में लगभग 400 लिंग-चयनात्मक गर्भपात हुए। इसी अवधि में भारतीय मूल की महिलाओं द्वारा कुल 13,843 गर्भपात कराए गए, जिनमें दो या उससे अधिक पिछले जन्म वाले बच्चे शामिल थे।

स्वास्थ्य और सामाजिक देखभाल विभाग ने कहा कि लिंग-चयनात्मक गर्भपात अवैध है। लिंग के आधार पर गर्भपात कराना अपराध माना जाता है और इसके लिए पुलिस में शिकायत की जा सकती है।

इंग्लैंड और वेल्स में गर्भपात का कानून 1861 के ‘Offences Against the Person Act’ के तहत आता है। इस कानून के तहत गर्भपात अवैध है, लेकिन 24 सप्ताह तक डॉक्टर की अनुमति पर गर्भपात कराना कानूनी है। लिंग-आधारित गर्भपात करना आजीवन कारावास तक की सज़ा का कारण बन सकता है।

यह रिपोर्ट भारतीय प्रवासी समुदाय में बेटों की चाहत और लिंग असंतुलन पर गंभीर सवाल खड़ा करती है और कानूनी चेतावनी भी देती है।

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