मौलाना कारी इसहाक गोरा का मुस्लिम शादियों में खुराफात पर कड़ा ऐतराज, कहा- दिखावा नहीं सुन्नत निभाएं

नई दिल्ली: जमीयत दावातुल मुस्लिमीन के संरक्षक और प्रसिद्ध देवबंदी उलेमा मौलाना कारी इसहाक गोरा ने मुस्लिम शादियों में बढ़ती खुराफात, नाच-गाने और गैर-शरई रस्मों पर सख्त एतराज जताया है। शनिवार को जारी किए गए एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि आज की शादियां मुकद्दस सुन्नत को दिखावे और झूठे स्टेटस का जरिया बन गई हैं, जो बेहद अफसोसनाक है।
शादियों में नाच-गाना और गैर-शरई रस्में गहरी चिंता का विषय
मौलाना इसहाक गोरा ने कहा, “जब मैं मदरसे, मस्जिदों और दीन के इदारों के बाहर से गुजरता हूं और वहां किसी मुस्लिम शादी की बारात को जाते हुए देखता हूं, तो उसमें ढोल-बाजे, नाच-गाना, तरह-तरह की खुराफात और बे-पर्दा लड़कियों की मौजूदगी मुझे गहरी सोच में डाल देती है कि हम क्या कर रहे हैं?”
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यही इस्लाम की बेहतरीन सुन्नत है, जिसे निकाह और शादी के पाक अमल के रूप में जाना जाता है, या यह सिर्फ दिखावे का जरिया बन गया है।
‘खुराफात स्टेटस नहीं बन सकती’
मौलाना ने आगे कहा कि समाज के जिम्मेदार लोग बार-बार इन गलत रस्मों पर रोक लगाने की कोशिश करते हैं, मगर जवाब में कहा जाता है कि “आज के दौर में यही स्टेटस है।” उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा, “नाच-गाना और गैर-इस्लामी रस्में मुसलमानों का स्टेटस कैसे हो सकती हैं?”
मौलाना ने यह भी स्पष्ट किया कि जो लोग शादी-ब्याह में नाच-गाने और खुराफात को अपनी शान समझते हैं, वे दीन की तालीम से नाबालिद हैं। अगर इसके बावजूद वह खुद को तालीम-याफ्ता कहते हैं, तो इसका मतलब है कि तालीम उनके सिर से होकर दिल तक नहीं पहुंची।
मुस्लिम समाज को सुधार की आवश्यकता
मौलाना ने जोर देते हुए कहा कि मुस्लिम समाज को सख्त सुधार की जरूरत है। उनका कहना है कि शादी जैसे पाक मौके को सादगी, हया और शरीअत के दायरे में अदा करना ही सुन्नत का असली तकाजा है।
उन्होंने अपील की, “मुसलमान दिखावे और झूठे स्टेटस से बाहर निकलें और अपनी शादियों को दीन के मुताबिक बनाने की सच्ची कोशिश करें। यही समाज की भलाई और आने वाली नस्लों की सही तरबियत सुनिश्चित करेगा।”




