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क्या असम में चलेगा बिहार वाला फॉर्मूला? चुनाव से पहले हिमंत बिस्वा सरमा के लोकलुभावन दांव

बिहार विधानसभा चुनाव के बाद अब राजनीतिक नजरें साल 2026 में होने वाले विधानसभा चुनावों पर टिक गई हैं। जिन राज्यों में इस साल चुनाव होने हैं, उनमें पश्चिम बंगाल और असम प्रमुख हैं। असम में मार्च–अप्रैल के बीच चुनाव संभावित हैं और सियासी सरगर्मियां तेज हो चुकी हैं। 10 साल से सत्ता में काबिज भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस बार भी जीत की हैट्रिक लगाने की तैयारी में है और इसके लिए वह बिहार वाला चुनावी फॉर्मूला अपनाती नजर आ रही है।

सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के ताबड़तोड़ ऐलान

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा चुनाव से करीब तीन महीने पहले लगातार लोकलुभावन घोषणाएं कर रहे हैं। नए साल के पहले दिन उन्होंने अंडरग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट पुरुष छात्रों के लिए नई वित्तीय सहायता योजना का ऐलान किया, वहीं महिलाओं के लिए चल रही ओरुनोदोई योजना के तहत 37 लाख लाभार्थियों को 8,000 रुपये का एकमुश्त ‘बिहू तोहफा’ देने की घोषणा की।

पुरुष छात्रों के लिए ‘बाबू आसोनी योजना’

असम सरकार ने पहले साल 2024 में बाल विवाह रोकने और शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए छात्राओं के लिए निजुत मोइना योजना शुरू की थी। इसके बाद पुरुष छात्रों के लिए भी ऐसी ही योजना की मांग उठी।

इसी क्रम में मुख्यमंत्री सरमा ने 1 फरवरी से ‘बाबू आसोनी योजना’ शुरू करने का ऐलान किया। इसके तहत—

  • योग्य पोस्टग्रेजुएट छात्रों को ₹2,000 प्रति माह
  • योग्य अंडरग्रेजुएट छात्रों को ₹1,000 प्रति माह
  • वार्षिक पारिवारिक आय सीमा: ₹4 लाख

महिलाओं को 8,000 रुपये का बिहू तोहफा

ओरुनोदोई योजना के तहत अब तक महिलाओं को हर महीने ₹1,250 की सहायता दी जाती रही है। लेकिन चुनावी साल को देखते हुए सीएम सरमा ने बड़ा फैसला लिया है।

उन्होंने कहा,
“जनवरी से मासिक राशि नहीं दी जाएगी। इसकी जगह 20 फरवरी को हर लाभार्थी महिला को ₹8,000 एडवांस बोहाग बिहू तोहफे के तौर पर दिए जाएंगे, ताकि वे त्योहार अच्छे से मना सकें।”

राशन कार्ड धारकों के लिए भी राहत

परिवारों को साधने के लिए सरकार ने राशन कार्ड धारकों को भी राहत दी है। अब हर कार्ड धारक—

  • 1 किलो मसूर दाल
  • 1 किलो चीनी
  • 1 किलो नमक

सिर्फ ₹100 में खरीद सकेगा। इससे पहले इन तीनों की संयुक्त कीमत ₹117 तय की गई थी।

बिहू के जरिए असमिया वोटर्स पर फोकस

बीजेपी ‘बिहू तोहफा’ के जरिए असमिया वोटर्स को साधने में जुटी है।

  • माघ बिहू: जनवरी के मध्य
  • बोहाग बिहू: अप्रैल के मध्य (असमिया नववर्ष)

इसी दौरान चुनावी प्रक्रिया अपने चरम पर होगी और संभावना है कि चुनाव की तारीखें भी इसी आसपास घोषित हों।

क्या असम में दोहराएगा बिहार मॉडल?

असम से पहले बिहार में भी ऐसा ही दांव खेला गया था। चुनाव से ठीक पहले महिलाओं के खातों में 10-10 हजार रुपये भेजे गए, जिसका सीधा फायदा एनडीए को मिला। महिला वोटर्स पर इस योजना का बड़ा असर पड़ा और नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जबकि आरजेडी महज 25 सीटों पर सिमट गई।

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