केशव प्रसाद मौर्य का बयान: “अगर मौका मिला तो मुख्यमंत्री बनना चाहेंगे”

केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्यमंत्री पद को लेकर दिए गए बयान से राजनीतिक चर्चा तेज कर दी है। एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि वह कब तक मुख्यमंत्री बनेंगे, तो उन्होंने कहा कि अगर पार्टी या विधायक दल चाहेगा तो वह इस जिम्मेदारी के लिए तैयार रहेंगे।
उन्होंने कहा कि राजनीति में कोई भी पद हासिल करने का फैसला पार्टी और विधायक दल करता है। साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि “अगर कुछ बनने की बात आएगी तो वह जरूर बनना चाहेंगे।”
यह बयान भारतीय जनता पार्टी के भीतर नेतृत्व और भविष्य की राजनीति को लेकर नई बहस का कारण बन गया है।
“निर्णय पार्टी करती है” — केशव मौर्य
केशव मौर्य ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री या किसी भी बड़े पद पर निर्णय पार्टी संगठन और विधानसभा में चुने गए विधायकों के हाथ में होता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सवालों का सीधा जवाब देना हमेशा आसान नहीं होता।
यह बातचीत अमर उजाला संवाद 2026 के दौरान हुई, जहां उनका बयान काफी चर्चा में आ गया।
2004 की घटना का किया जिक्र, अतीक अहमद का नाम लिया
इसी कार्यक्रम में उन्होंने साल 2004 के विधानसभा उपचुनाव का एक पुराना किस्सा भी साझा किया। उन्होंने बताया कि उस समय वे पहली बार चुनाव लड़ रहे थे और माहौल काफी तनावपूर्ण था।
अतीक अहमद का नाम लेते हुए उन्होंने कहा कि उस दौर में राजनीतिक माहौल बहुत संघर्षपूर्ण था और दोनों पक्षों के पास हथियार तक मौजूद थे।
मौर्य ने उस घटना को याद करते हुए कहा कि उस समय स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि टकराव की आशंका बनी हुई थी।
सियासी हलकों में चर्चा तेज
डिप्टी सीएम के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। एक तरफ इसे उनके आत्मविश्वास से जोड़कर देखा जा रहा है, तो दूसरी तरफ इसे पार्टी के भीतर संभावित नेतृत्व संतुलन के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।




