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ईरान–अमेरिका तनाव के बीच कूटनीतिक बातचीत जारी, पाकिस्तान के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान

ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण हालात के बावजूद कूटनीतिक स्तर पर बातचीत का सिलसिला जारी है। दोनों देशों के बीच कई अहम मुद्दों पर अप्रत्यक्ष संवाद चल रहा है, जिसमें मध्यस्थता की भूमिका भी सामने आई है।

पाकिस्तान के जरिए हो रहा संदेशों का आदान-प्रदान

इस्माइल बाघेई ने कहा है कि ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान के माध्यम से लगातार संदेशों का आदान-प्रदान हो रहा है। उन्होंने बताया कि तेहरान अमेरिकी रुख की समीक्षा कर रहा है और कूटनीतिक विकल्पों पर विचार जारी है।

ईरान की प्रमुख शर्तें क्या हैं?

ईरान ने बातचीत के दौरान कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं:

  • फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को जारी किया जाए
  • ईरानी जहाजों के खिलाफ कथित कार्रवाई बंद हो
  • समुद्री मार्गों पर “दुश्मनी भरी गतिविधियों” पर रोक

ईरान का कहना है कि उसने कूटनीतिक प्रक्रिया में गंभीरता दिखाई है, लेकिन पिछले अनुभवों के कारण वॉशिंगटन पर उसका भरोसा कमजोर है।

होर्मुज स्ट्रेट पर नया प्रस्ताव

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने नई रणनीति सामने रखी है। ईरान और ओमान मिलकर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग में “स्थायी सुरक्षा व्यवस्था” बनाने की बात कर रहे हैं।

इस क्षेत्र से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है, इसलिए यह मार्ग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद संवेदनशील माना जाता है।

अमेरिका का नया ड्राफ्ट प्रस्ताव

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान द्वारा 14-सूत्रीय प्रस्ताव दिए जाने के बाद अमेरिका ने भी तेहरान को नया ड्राफ्ट भेजा है। मध्यस्थ पक्ष दोनों देशों के प्रस्तावों को करीब लाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है।

ईरान राष्ट्रपति का बयान

मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि ईरान हमेशा अपने वादों पर कायम रहा है और युद्ध टालने की कोशिश की है। उन्होंने यह भी कहा कि दबाव डालकर ईरान को झुकाने की कोशिश सफल नहीं होगी।

संघर्ष और युद्धविराम की पृष्ठभूमि

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच करीब 40 दिनों तक संघर्ष चला था, जिसके बाद युद्धविराम हुआ। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच कई दौर की बातचीत भी हुई, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो सका।

निष्कर्ष

हालांकि तनाव अभी भी बना हुआ है, लेकिन अप्रत्यक्ष कूटनीतिक चैनल सक्रिय हैं। पाकिस्तान की मध्यस्थता और नए प्रस्तावों के जरिए बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी है।

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