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शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूटा

मुंबई: भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते बाजार दबाव में नजर आया। कारोबार के दौरान बीएसई सेंसेक्स 700 अंक से अधिक टूट गया, जबकि निफ्टी 23,300 के नीचे फिसल गया।

सेंसेक्स और निफ्टी में तेज गिरावट

कारोबार के दौरान सेंसेक्स 726 अंक से अधिक टूटकर 73,923 के स्तर तक पहुंच गया। वहीं निफ्टी भी करीब 190 अंक गिरकर 23,285 के आसपास कारोबार करता दिखाई दिया। बाजार की शुरुआत भी कमजोरी के साथ हुई थी और दिनभर बिकवाली का दबाव बना रहा।

क्यों टूटा शेयर बाजार?

विश्लेषकों के मुताबिक बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने से निवेशकों की चिंता बढ़ी है, जिससे जोखिम वाले निवेश से दूरी बनाई जा रही है। साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी बाजार का मूड खराब किया है।

इसके अलावा विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली और रुपये पर दबाव भी बाजार के लिए नकारात्मक संकेत बने हुए हैं।

एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख

एशियाई बाजारों में बुधवार को मिश्रित कारोबार देखने को मिला। जापान का शेयर बाजार मजबूती के साथ नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि हांगकांग के बाजार में कमजोरी रही। निवेशक फिलहाल वैश्विक तनाव के बीच सतर्क रुख अपनाए हुए हैं।

अमेरिकी बाजार रिकॉर्ड स्तर पर बंद

मंगलवार के कारोबारी सत्र में अमेरिकी बाजारों ने मजबूती दिखाई। प्रमुख अमेरिकी सूचकांक नए रिकॉर्ड स्तरों पर बंद हुए। हालांकि भारतीय बाजारों पर इसका सकारात्मक असर नहीं दिखा क्योंकि निवेशकों का फोकस पश्चिम एशिया के तनाव और तेल कीमतों पर रहा।

कच्चे तेल में उछाल से बढ़ी चिंता

ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई है। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय हैं क्योंकि इससे महंगाई और व्यापार घाटा बढ़ सकता है। यही वजह है कि निवेशकों ने बाजार में मुनाफावसूली शुरू कर दी।

रुपये पर भी दबाव

डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार बढ़ती तेल कीमतों और वैश्विक अनिश्चितता के कारण रुपये पर दबाव बढ़ा है। भारतीय रिजर्व बैंक को भी बाजार में हस्तक्षेप करना पड़ा ताकि रुपये की गिरावट को सीमित किया जा सके।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेशकों को जल्दबाजी में फैसले लेने से बचना चाहिए और लंबी अवधि की रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।

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