धर्म/अध्यात्म

कालाष्टमी 2026: 08 जून को करें काल भैरव की पूजा, जानिए क्या करें और क्या नहीं

सनातन धर्म में हर माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी मनाई जाती है। इस दिन भगवान काल भैरव की विशेष पूजा और व्रत करने का विधान है। भगवान काल भैरव को भगवान शिव का रौद्र स्वरूप और अंशावतार माना जाता है।

मान्यता है कि काल भैरव की पूजा से जीवन की नकारात्मकता दूर होती है और शनि, राहु तथा केतु के अशुभ प्रभावों से भी राहत मिलती है।

इस वर्ष ज्येष्ठ मास की कालाष्टमी 08 जून 2026 को मनाई जाएगी, और चूंकि इस बार अधिकमास चल रहा है, इसलिए इसका महत्व और भी अधिक माना जा रहा है।

कालाष्टमी पर क्या न करें

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी के दिन कुछ कार्यों से बचना बेहद जरूरी माना गया है—

कुत्ते को न मारें या न सताएं

कालाष्टमी के दिन कुत्ते को जूते-चप्पल दिखाना या उसे मारना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि कुत्ता भगवान काल भैरव का प्रतीक है, इसलिए उसे कष्ट देना वर्जित है।

जूठा भोजन न दें

इस दिन कुत्ते को जूठा भोजन खिलाने से भी बचना चाहिए। इसके बजाय काले कुत्ते को रोटी, दूध या मीठे बिस्कुट देना शुभ माना जाता है।

नमक का सेवन न करें (व्रत में)

जो लोग कालाष्टमी का व्रत रखते हैं, उन्हें नमक का सेवन नहीं करना चाहिए। इससे व्रत भंग माना जाता है और इसका शुभ फल नहीं मिलता।

मांसाहार और शराब से दूरी रखें

व्रत न रखने वालों के लिए भी इस दिन मांसाहार और शराब का सेवन वर्जित माना गया है।

अनैतिक कार्यों से बचें

शास्त्रों के अनुसार इस दिन किसी भी प्रकार के अनुचित या अनैतिक कार्य करने से बचना चाहिए, क्योंकि काल भैरव को ‘दंडपाणि’ माना जाता है।

कालाष्टमी पर क्या करें

कालाष्टमी के दिन भगवान काल भैरव को प्रसन्न करने के लिए कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं—

  • काले कुत्ते को दूध या रोटी खिलाना
  • काल भैरव मंदिर में सरसों के तेल का दीपक जलाना
  • उड़द की दाल, काले तिल और सरसों का तेल दान करना
  • छोटे बच्चों को उपहार देना या सेवा करना

मान्यता है कि इन उपायों को करने से भगवान काल भैरव प्रसन्न होते हैं और जीवन की बाधाएं दूर करते हैं।

कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

कालाष्टमी का दिन विशेष रूप से तंत्र साधना और काल भैरव की उपासना के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन की गई पूजा व्यक्ति के जीवन से भय, बाधा और नकारात्मक ऊर्जा को दूर करने में सहायक मानी जाती है।

इस वर्ष अधिकमास में पड़ने के कारण यह कालाष्टमी और भी विशेष मानी जा रही है।

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