यूपी विधानसभा चुनाव: सपा ने तेज की रणनीति, 150 सीटों पर उम्मीदवारों को लेकर मंथन

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी (सपा) ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी एक बार फिर 2024 की रणनीति को आधार बनाकर उम्मीदवार चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।
पार्टी नेतृत्व का फोकस ऐसे उम्मीदवारों पर है जो अपने क्षेत्र में जातीय और सियासी समीकरणों को मजबूत तरीके से साध सकें।
35 जिलों की 150 सीटों पर हो चुका है मंथन
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, समाजवादी पार्टी अब तक 35 जिलों की करीब 150 विधानसभा सीटों पर बैठकों के जरिए समीक्षा कर चुकी है। पार्टी की योजना है कि जुलाई तक इन सीटों पर संभावित उम्मीदवारों के नामों को शॉर्टलिस्ट कर लिया जाए।
दलबदलुओं पर भी नजर
सपा की रणनीति के तहत ऐसे नेताओं की भी पहचान की जा रही है जो फिलहाल बीजेपी, आरएलडी, बसपा या सुभासपा से जुड़े हैं, लेकिन चुनाव से पहले पाला बदल सकते हैं। इनमें कुछ ऐसे नाम भी शामिल हैं जिनके सपा नेतृत्व से पुराने संबंध रहे हैं।
स्थानीय उम्मीदवारों को प्राथमिकता
पार्टी का स्पष्ट रुख है कि हर सीट पर स्थानीय और मजबूत जनाधार वाले उम्मीदवार को ही टिकट दिया जाएगा। किसी भी बाहरी उम्मीदवार को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।
साथ ही संगठन को निर्देश दिए गए हैं कि जिन सीटों पर पार्टी कमजोर रही है, वहां जनाधार बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
संगठन को भी दी गई अहम जिम्मेदारी
सपा ने 24 जिलों में संगठनात्मक पदाधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी दी है, जिनका काम उम्मीदवारों के जातीय संतुलन, राजनीतिक स्वीकार्यता और जनाधार का आकलन करना होगा।
अखिलेश यादव का सख्त संदेश
पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने साफ कर दिया है कि अगर संगठन का कोई पदाधिकारी चुनाव लड़ना चाहता है, तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि चुनाव के दौरान संगठनात्मक नियमों में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी पूरी तरह रणनीतिक मोड में आ गई है। जातीय समीकरण, स्थानीय उम्मीदवार और दलबदलुओं की भूमिका इस बार चुनावी समीकरण को प्रभावित कर सकती है।



