उत्तर प्रदेश

फॉरेंसिक सबूतों की कमी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रेप और हत्या से जुड़े एक मामले में वैज्ञानिक सबूतों के अभाव को आधार बनाते हुए आरोपी को जमानत दे दी। इस दौरान अदालत ने उत्तर प्रदेश की फॉरेंसिक जांच व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई।

Allahabad High Court ने कहा कि वह “भारी मन” से आरोपी को जमानत देने के लिए मजबूर है, क्योंकि वैज्ञानिक साक्ष्य आरोपी को अपराध से जोड़ने में असफल रहे।

DNA रिपोर्ट में सामने आई बड़ी खामी

जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने बताया कि फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की रिपोर्ट से यह साबित नहीं हो सका कि मृतका के वेजाइनल स्मीयर से मिला DNA प्रोफाइल आरोपी से मेल खाता है।

कोर्ट के अनुसार DNA प्रोफाइल पूरी तरह विकसित नहीं हो सकी, जिसके कारण उसके स्रोत की पहचान संभव नहीं रही। इसी वजह से वैज्ञानिक साक्ष्य आरोपी के खिलाफ निर्णायक नहीं बन पाए।

यूपी की फॉरेंसिक व्यवस्था पर सवाल

अदालत ने राज्य की फॉरेंसिक साइंस लैब (Forensic Science Laboratory Uttar Pradesh) की बदहाल स्थिति पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि कई मामलों में यही समस्या सामने आती है, जहां DNA प्रोफाइल अधूरी रह जाती है और जांच प्रभावित होती है।

कोर्ट ने टिप्पणी की कि पुरानी मशीनें और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर इस स्थिति के मुख्य कारण हैं, जिससे अपराधियों तक पहुंचने में बाधा आती है।

मशीनों और संसाधनों की कमी को बताया जिम्मेदार

हाईकोर्ट ने स्पष्ट कहा कि फॉरेंसिक लैब में आधुनिक मशीनों और पर्याप्त संसाधनों की कमी राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। अदालत ने कहा कि इस स्थिति के लिए किसी और को नहीं, बल्कि सरकार को जवाबदेह माना जाएगा।

सरकार को सुधार के निर्देश

अदालत ने आरोपी को जमानत देते हुए उम्मीद जताई कि राज्य सरकार फॉरेंसिक लैब्स को आधुनिक मशीनें और पर्याप्त स्टाफ उपलब्ध कराएगी।

साथ ही हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (compliance) को निर्देश दिया गया कि आदेश की प्रति मुख्य सचिव तक पहुंचाई जाए ताकि इसे मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया जा सके।

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