स्मार्ट प्रीपेड मीटर में देरी पर यूपी पावर कॉरपोरेशन पर 7.18 लाख का जुर्माना

उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर सिस्टम के तहत रिचार्ज के बाद भी तय समय में बिजली आपूर्ति बहाल न होने पर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन पर 7.18 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह राशि 15 दिन के भीतर जमा करनी होगी।
यह फैसला आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह की दो सदस्यीय पीठ ने सुनाया।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था में क्या गड़बड़ी सामने आई
प्रदेश में लागू स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था के तहत नियम है कि अगर किसी उपभोक्ता का बैलेंस खत्म होने पर बिजली कट जाती है तो रिचार्ज करने के बाद अधिकतम दो घंटे के भीतर आपूर्ति बहाल हो जानी चाहिए। लेकिन जांच में पाया गया कि कई मामलों में इस समयसीमा का पालन नहीं किया गया।
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग में याचिका दाखिल कर लगभग 1.93 लाख उपभोक्ताओं के लिए मुआवजे की मांग की थी। आयोग ने इस पर विस्तृत जांच के बाद पाया कि 13, 14, 16, 17, 18, 23, 25, 28 मार्च और 2 व 7 अप्रैल 2026 को सेवा मानकों का पालन नहीं हुआ।
सेवा मानक में बड़ी चूक, अनुपालन 95% की जगह 77% पर पहुंचा
जांच में यह भी सामने आया कि तय मानक के अनुसार कम से कम 95 प्रतिशत अनुपालन जरूरी था, लेकिन यह घटकर 77 प्रतिशत रह गया। आयोग के सामने पावर कॉरपोरेशन ने भी स्वीकार किया कि कई मामलों में बिजली आपूर्ति निर्धारित समय में बहाल नहीं हो सकी।
इसी आधार पर आयोग ने प्रति उल्लंघन एक लाख रुपये और प्रत्येक दिन की देरी पर छह हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना जोड़ते हुए कुल 7.18 लाख रुपये का दंड तय किया।
उपभोक्ताओं को मुआवजे की भी मांग
उपभोक्ता परिषद का कहना है कि 1.93 लाख प्रभावित उपभोक्ताओं को प्रतिदिन 50 रुपये के हिसाब से मुआवजा मिलना चाहिए। परिषद के अनुसार यह किसी राज्य में डिस्कॉम पर लगाया गया अब तक का सबसे बड़ा नियामकीय दंड माना जा रहा है।
आयोग ने पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक से 15 दिनों के भीतर विस्तृत जवाब भी मांगा है।




