उत्तर प्रदेश में बढ़ी ठंड के साथ बिगड़ी हवा की क्वालिटी, नोएडा-गाजियाबाद में AQI 400 पार — सांस लेना हुआ मुश्किल

उत्तर प्रदेश में सर्दी बढ़ने के साथ ही कई शहरों की हवा जहरीली हो गई है। दिल्ली से सटे जिलों — नोएडा, गाजियाबाद, ग्रेटर नोएडा और मेरठ — की हवा की गुणवत्ता गंभीर श्रेणी (Severe Category) में पहुंच चुकी है।
सुबह की शुरुआत अब धुंध और स्मॉग की मोटी परत के बीच हो रही है, जिससे सांस लेना भी मुश्किल हो गया है।
सर्द हवाओं के साथ बढ़ा प्रदूषण
पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी का असर अब मैदानी इलाकों में दिखाई देने लगा है।
ठंडी हवाओं और गिरते तापमान के कारण हवा की गति धीमी हो गई है, जिससे प्रदूषित कण सतह पर जम रहे हैं।
इस वजह से सुबह और शाम के समय स्मॉग की चादर और भी घनी हो रही है।
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, प्रदूषण के चलते लोगों को
- सांस लेने में तकलीफ,
- आंखों में जलन,
- गले में खराश,
- और बुखार जैसी समस्याएं हो रही हैं।
नोएडा में AQI 400 के पार
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के ताज़ा आंकड़ों के अनुसार बुधवार सुबह नोएडा के कई इलाकों में हवा की स्थिति बेहद खराब रही —
| इलाका | AQI (सुबह 6 बजे) | श्रेणी |
|---|---|---|
| सेक्टर-125 | 415 | गंभीर (Severe) |
| सेक्टर-116 | 414 | गंभीर (Severe) |
| सेक्टर-1 | 404 | गंभीर (Severe) |
| सेक्टर-62 | 367 | बहुत खराब (Very Poor) |
विशेषज्ञों के मुताबिक, जब AQI 400 से ऊपर पहुंच जाता है, तो वह ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक होता है।
गाजियाबाद की हवा भी दमघोंटू
गाजियाबाद भी इस समय प्रदूषण के मामले में पीछे नहीं है। शहर के कई इलाकों में AQI 400 के आसपास दर्ज किया गया।
| इलाका | AQI | श्रेणी |
|---|---|---|
| लोनी | 405 | गंभीर |
| संजय नगर | 359 | बहुत खराब |
| वसुंधरा | 344 | बहुत खराब |
दिल्ली से सटे अन्य जिलों का हाल
दिल्ली-NCR के अन्य हिस्सों में भी हालात चिंताजनक हैं —
| शहर | AQI | श्रेणी |
|---|---|---|
| ग्रेटर नोएडा (नॉलेज पार्क-5) | 394 | बहुत खराब |
| हापुड़ | 339 | बहुत खराब |
| बुलंदशहर | 337 | बहुत खराब |
| मेरठ (पल्लवपुरम) | 316 | बहुत खराब |
प्रदूषण बढ़ने की वजह क्या है?
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, तापमान गिरने के कारण हवा भारी हो जाती है और उसकी गति धीमी पड़ जाती है।
इस वजह से धूल, धुआं और प्रदूषक तत्व जमीन के पास ही जमे रहते हैं, जिससे स्मॉग (धुंध + धुआं) की मोटी परत बनती है।
साथ ही,
- वाहनों से निकलने वाला धुआं,
- कचरा और पराली जलाने की घटनाएं,
- और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण की कमी भी प्रदूषण के मुख्य कारण हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह
डॉक्टरों ने लोगों को सुबह और रात के समय अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने,
मास्क पहनने,
और घर के अंदर पौधों व एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
बुजुर्गों, बच्चों और अस्थमा के मरीजों को विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है।



