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सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट के प्रावधान रद्द किए, न्यायिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट, 2021 के कई प्रावधानों को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि मामूली बदलाव करके पिछले फैसले को निष्प्रभावी करना असंवैधानिक है और यह न्यायिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है।

मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने कहा कि 2021 अधिनियम के तहत किए गए सुधार संरचनात्मक कमियों को दूर नहीं कर सकते। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन के लिए तीन महीने का समय दिया है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ITAT के सदस्यों का कार्यकाल पुराने अधिनियम के अनुसार ही रहेगा, 2021 के कानून के संक्षिप्त कार्यकाल के अनुसार नहीं।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 2021 अधिनियम के प्रावधान बरकरार नहीं रखे जा सकते, क्योंकि यह शक्तियों के पृथक्करण और न्यायिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों का उल्लंघन करता है। कोर्ट ने बताया कि जुलाई 2021 में न्यायाधिकरण सुधार अध्यादेश द्वारा वित्त अधिनियम, 2017 की धारा 184 को रद्द किया गया था, जिसने सदस्यों और अध्यक्ष का कार्यकाल चार साल तक निर्धारित किया था।

कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई विधायी उपाय मौलिक अधिकारों या संवैधानिक सिद्धांतों का उल्लंघन करता है, तो न्यायालय उसे रद्द कर सकता है। कोर्ट के निर्देश, जो न्यायिक निकायों की स्वतंत्रता और संरचना से संबंधित हैं, बाध्यकारी होते हैं।

इस फैसले के बाद केंद्र सरकार को अब राष्ट्रीय न्यायाधिकरण आयोग के गठन और ITAT सदस्यों की नियुक्तियों में पुराने अधिनियम के नियमों का पालन करना होगा।

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