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बॉम्बे हाई कोर्ट ने ब्रह्मोस सेंटर के साइंटिस्ट निशांत अग्रवाल को दी बड़ी राहत

ब्रह्मोस मिसाइल सेंटर में काम कर चुके यंग साइंटिस्ट अवॉर्ड-विनर निशांत अग्रवाल को सात साल लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार इंसाफ मिल गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने उन्हें जासूसी और गोपनीय जानकारी पाकिस्तान को लीक करने के गंभीर आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने साफ कहा कि प्रॉसिक्यूशन इरादा, जानकारी संप्रेषण और राज्य की सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने का कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका

2018 में गिरफ्तारी के बाद से अग्रवाल ने लगभग 7 वर्ष जेल में बिताए, जिससे उनका करियर ठप पड़ गया था। हाई कोर्ट के फैसले के बाद उन्होंने कहा—
“आखिरकार मुझे और मेरे परिवार को इंसाफ मिला। मैं फिर से नई जिंदगी शुरू करूंगा। मैं हमेशा फाइटर रहा हूं।”

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

निशांत अग्रवाल लिंक्डइन पर अपना बायोडेटा अपडेट कर रहे थे, तभी ‘सेजल कपूर’ नाम की एक आईडी से उन्हें फ्रेंड रिक्वेस्ट मिली। उन्हें अंदाजा नहीं था कि यह अकाउंट पाकिस्तान से ऑपरेट हो रहा है।

2017 की 4 दिन की चैट में ‘कपूर’ ने अग्रवाल को यूके में नौकरी का ऑफर बताया और एक सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने को कहा—जो बाद में मैलवेयर निकला।

कोर्ट में जांच के दौरान सामने आया कि—

  • अग्रवाल ने किसी भी डिपार्टमेंटल दस्तावेज को लिंक्डइन पर अपलोड नहीं किया था।
  • ब्रह्मोस में लिंक्डइन या नौकरी खोजने पर कोई प्रतिबंध नहीं था।
  • डाउनलोड किया गया मैलवेयर नौकरी पाने की कोशिश का हिस्सा था, न कि डेटा चोरी का।

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