US-Iran Ceasefire: 40 दिन के युद्ध पर ब्रेक, किन शर्तों पर माने डोनाल्ड ट्रंप और ईरान?

जुबिली न्यूज डेस्क
करीब 40 दिनों से जारी भीषण संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच 14 दिनों के सीजफायर पर सहमति बन गई है। इस समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर भी सहमति बनी है, जो वैश्विक तेल सप्लाई के लिहाज से बेहद अहम है।
व्हाइट हाउस ने बताया ‘जीत’
व्हाइट हाउस ने इस सैन्य अभियान को “जीत” करार देते हुए कहा कि सैन्य दबाव के कारण ही कूटनीतिक बातचीत का रास्ता खुला।
पाकिस्तान की अहम भूमिका
सीजफायर से ठीक पहले पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने दोनों देशों के बीच बातचीत करवाई।
बताया जा रहा है कि 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में औपचारिक बातचीत भी प्रस्तावित है।
ईरान की शर्तें क्या हैं?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया—
- अगर हमले पूरी तरह बंद होते हैं, तो ईरान भी सैन्य कार्रवाई रोकेगा
- 2 हफ्तों तक होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही होगी
- लेकिन इस पर नियंत्रण ईरान का रहेगा
ईरान का 10-सूत्रीय शांति प्रस्ताव
ईरान ने पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को 10 प्रमुख शर्तें भेजी हैं:
- आर्थिक प्रतिबंध हटाना
- क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी
- इज़राइल-ईरान संघर्ष पर स्पष्ट नीति
- होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखना
- युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा
- यूरेनियम संवर्धन के अधिकार की मान्यता
- भविष्य में हमले न करने की गारंटी
- संयुक्त राष्ट्र और IAEA के प्रस्तावों में ढील
- क्षेत्रीय मोर्चों (जैसे लेबनान में हिजबुल्लाह) पर शांति
ट्रंप का बयान
ट्रंप ने कहा कि ईरान का प्रस्ताव “बातचीत शुरू करने के लिए एक व्यवहारिक आधार” है। उन्होंने दो सप्ताह के युद्धविराम की पुष्टि की।
वहीं ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने भी इस समझौते को अपनी “रणनीतिक जीत” बताया है।
आगे क्या?
- 14 दिन का सीजफायर बेहद अहम
- इस दौरान कूटनीतिक बातचीत तय करेगी आगे का रास्ता
- होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति पर दुनिया की नजर



