यूपी में चुनाव से पहले बीजेपी का बड़ा कदम: लखनऊ में नया अंबेडकर स्मारक

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले संविधान और डॉ. भीमराव अंबेडकर को लेकर सियासी हलचलें तेज हो गई हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार लखनऊ के गोमती नगर में उनके नाम पर नया मेमोरियल और कल्चरल सेंटर बना रही है।
बीजेपी का यह कदम राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे दलित वोटरों को आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है।
स्मारक की खासियत और बजट
- स्मारक का क्षेत्रफल लगभग 5,493.52 वर्ग मीटर होगा
- 25 फीट ऊंची अंबेडकर की मूर्ति
- ऑडिटोरियम, लाइब्रेरी, रिसर्च सेंटर और शोध सुविधाएं
- आसपास के स्थल का सौंदर्यीकरण
- शुरुआती बजट: ₹45 करोड़, अब बढ़कर ₹100 करोड़
- उद्घाटन: 2027 से पहले जुलाई
इस स्मारक की नींव 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने रखी थी।
बीजेपी समर्थकों में भी हैरानी
बीजेपी द्वारा अंबेडकर स्मारक बनवाने का फैसला कुछ समर्थकों को हैरान कर रहा है। क्योंकि पार्टी ने पहले इस तरह के स्मारकों का विरोध किया था। अब चुनावी रणनीति के तहत करोड़ों रुपये खर्च करके यही रास्ता अपनाया जा रहा है।
लखनऊ में दो अंबेडकर स्मारक
लखनऊ में पहले से ही मायावती की सरकार ने अंबेडकर स्मारक बना रखा है। अब बीजेपी भी नया स्मारक बना रही है।
- बसपा स्मारक: ऐशबाग
- बीजेपी स्मारक: गोमती नगर
दो स्मारक होने का राजनीतिक महत्व भी है, क्योंकि यह दलित वोटरों के बीच सियासी संदेश भेजता है।
दलित वोटरों को साधने की रणनीति
बीजेपी का यह कदम 2024 के लोकसभा चुनावों में सपा और कांग्रेस को मिले बढ़त के बाद उठाया गया है।
- 2024 में संविधान और आरक्षण के मुद्दे पर विपक्षी दलों को दलित वोटरों का समर्थन मिला
- सपा ने यूपी में 36 लोकसभा सीटें जीती, कांग्रेस को 6 सीटें मिलीं
- बीजेपी दूसरे नंबर पर रही
इसलिए अब चुनाव से पहले अंबेडकर स्मारक जनता के लिए खोलकर दलित वोटरों में पैठ बनाने की कोशिश की जा रही है।




