
इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान पीस टॉक: पाकिस्तान की अहम भूमिका
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच पूरी दुनिया की नजरें इस समय इस्लामाबाद पर टिकी हैं, जहां अमेरिका और ईरान के बीच अहम शांति वार्ता (Peace Talks) की शुरुआत हो गई है। इस बातचीत में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जिसने हाल ही में दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने में भी बड़ा योगदान दिया।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की थी।
ईरान की तरफ से शामिल बड़े नाम
इस शांति वार्ता में ईरान की ओर से 6 वरिष्ठ नेता शामिल हुए हैं। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व ईरानी संसद के स्पीकर एमबी गालिबाफ कर रहे हैं। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी मौजूद हैं।
इसके अलावा प्रतिनिधिमंडल में ये प्रमुख चेहरे शामिल हैं:
- अली अकबर अहमदीन (सर्वोच्च राष्ट्रीय रक्षा परिषद के सचिव)
- अब्दोलनासेर हेम्मती (केंद्रीय बैंक गवर्नर)
- मजीद तख्त रखांची (वरिष्ठ राजनयिक)
- मोहम्मद बागेर जोल्घाद्र (सुरक्षा विशेषज्ञ)
ईरान का यह डेलीगेशन करीब 70 सदस्यों का है, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ और मीडिया कर्मी भी शामिल हैं।
‘मीनाब 168’ नाम से खास संदेश
ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अपने मिशन को ‘मीनाब 168’ नाम दिया है। यह नाम मीनाब शहर में एक स्कूल पर हुए हमले में मारे गए 168 बच्चों की याद में रखा गया है।
इस नाम के जरिए ईरान शांति वार्ता के मंच पर मासूमों की याद और वैश्विक शांति का संदेश देना चाहता है।
अमेरिका की तरफ से कौन-कौन शामिल?
अमेरिका की ओर से 4 प्रमुख नेता इस वार्ता में भाग ले रहे हैं। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं।
उनके साथ ये प्रमुख नाम शामिल हैं:
- जारेड कुशनर (पूर्व सलाहकार)
- स्टीव विटकॉफ (विशेष दूत)
- ब्रैड कूपर (वाइस एडमिरल)
पाकिस्तान की मेजबानी और अहम भूमिका
इस वार्ता की मेजबानी पाकिस्तान कर रहा है। पाकिस्तान की तरफ से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, सेना प्रमुख असीम मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोहम्मद असीम मलिक इस बैठक में शामिल हैं।
क्या सफल होगी ये शांति वार्ता?
दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए 2 हफ्ते के सीजफायर के बाद यह बातचीत बेहद अहम मानी जा रही है। अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि क्या यह वार्ता स्थायी शांति का रास्ता खोल पाएगी या नहीं।



