वित्त मंत्रालय की इस योजना को कैबिनेट मंजूरी , MSMEs और एविएशन सेक्टर को राहत की उम्मीद

नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय ने 2.5 लाख करोड़ रुपये की बड़ी क्रेडिट गारंटी योजना के लिए कैबिनेट नोट तैयार कर लिया है। मंत्रालयों के बीच परामर्श प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और अब इस प्रस्ताव के जल्द कैबिनेट में रखे जाने की संभावना है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, यह योजना व्यय वित्त समिति (EFC) से पहले ही मंजूरी प्राप्त कर चुकी है। EFC ने इस प्रस्ताव की संरचना, वित्तीय प्रभाव और डिजाइन की समीक्षा के बाद इसे आगे बढ़ाने की सिफारिश की है। यह कैबिनेट मंजूरी से पहले का एक अहम प्रशासनिक चरण होता है।
यह प्रस्तावित योजना ‘आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना (ECLGS)’ के विस्तार के रूप में तैयार की गई है, जिसे पहले कोविड-19 महामारी के दौरान MSMEs को राहत देने के लिए लागू किया गया था। अब इसे व्यापक स्तर पर MSMEs, एयरलाइंस और भू-राजनीतिक तनाव से प्रभावित अन्य व्यवसायों तक बढ़ाने की तैयारी है।
किन सेक्टरों को मिलेगा लाभ
इस योजना का मुख्य उद्देश्य उन क्षेत्रों को नकदी संकट से राहत देना है जो सप्लाई चेन बाधाओं, बढ़ती लागत और वैश्विक अनिश्चितताओं से प्रभावित हैं। खासतौर पर:
- सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs)
- विमानन (Aviation) सेक्टर
- आयात पर निर्भर और बाहरी झटकों से प्रभावित व्यवसाय
अधिकारियों के अनुसार, एविएशन सेक्टर पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जो ईंधन कीमतों और वैश्विक तनाव के कारण दबाव में है।
योजना का उद्देश्य
सरकार का लक्ष्य इस क्रेडिट गारंटी तंत्र के जरिए व्यवसायों को पर्याप्त ऋण उपलब्ध कराना है ताकि:
- नकदी संकट कम हो
- लोन डिफॉल्ट की स्थिति न बने
- प्रभावित सेक्टरों में आर्थिक गतिविधियां सुचारू रहें
यह योजना ऐसे समय पर लाई जा रही है जब पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और वैश्विक बाजारों की अनिश्चितता ने कमोडिटी कीमतों और व्यापार प्रवाह को प्रभावित किया है।
आगे की प्रक्रिया
अब यह प्रस्ताव कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अंतिम निर्णय और लागू होने की समय-सीमा पूरी तरह कैबिनेट के फैसले पर निर्भर करेगी।
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि मंजूरी मिलने के बाद यह योजना अर्थव्यवस्था के दबाव वाले सेक्टरों को महत्वपूर्ण राहत प्रदान कर सकती है।



