Adhik Maas 2026: अधिकमास में क्यों किए जाते हैं 33 मालपुओं का दान? जानिए धार्मिक रहस्य और महत्व

हिंदू धर्म में अधिकमास को बेहद पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। इस साल अधिकमास की शुरुआत 17 मई से हुई है और यह 15 जून तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह माह भगवान Vishnu को समर्पित होता है। इस दौरान पूजा-पाठ, जप, तप और दान का विशेष महत्व बताया गया है।
अधिकमास को मलमास और पुरुषोत्तम मास के नाम से भी जाना जाता है। इस पूरे महीने में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ मांगलिक कार्य वर्जित माने जाते हैं। मान्यता है कि इस दौरान किए गए धार्मिक कार्यों का कई गुना अधिक फल प्राप्त होता है।
क्यों लगता है अधिकमास?
हिंदू पंचांग सूर्य और चंद्रमा की गति पर आधारित होता है। एक सौर वर्ष में लगभग 365 दिन होते हैं, जबकि चंद्र वर्ष करीब 354 दिनों का माना जाता है। हर साल दोनों के बीच करीब 11 दिनों का अंतर आ जाता है।
जब तीन वर्षों में यह अंतर लगभग 33 दिनों का हो जाता है, तब इस अंतर को संतुलित करने के लिए अधिकमास जोड़ा जाता है। यही कारण है कि अधिकमास हर तीसरे साल आता है।
अधिकमास में 33 मालपुओं का दान क्यों शुभ माना जाता है?
धार्मिक ग्रंथ Padma Purana के अनुसार अधिकमास में 33 मालपुओं का दान करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि भगवान विष्णु को मालपुए बेहद प्रिय हैं। इसलिए इस माह में पहले भगवान को मालपुओं का भोग लगाया जाता है और फिर उनका दान किया जाता है।
33 संख्या का धार्मिक रहस्य
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 33 मालपुओं का संबंध 33 कोटि देवी-देवताओं से माना जाता है। ऐसा विश्वास है कि 33 मालपुओं का दान करने से सभी देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।
इसके साथ ही पितरों की कृपा भी प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति बनी रहती है। कहा जाता है कि कांसे के पात्र में रखकर गरीबों और जरूरतमंदों को मालपुए दान करने से दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक परेशानियां कम होती हैं।
अधिकमास में क्या करें?
- भगवान विष्णु की पूजा करें
- मंत्र जाप और ध्यान करें
- दान-पुण्य करें
- जरूरतमंदों की सहायता करें
- सात्विक भोजन ग्रहण करें
अधिकमास में क्या न करें?
- विवाह और मांगलिक कार्य
- गृह प्रवेश
- नया व्यवसाय शुरू करना
- तामसिक भोजन और गलत कार्य



