धर्म/अध्यात्म

सावन पूर्णिमा पर लगेगा साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, जानिए भारत में दिखेगा या नहीं

Chandra Grahan 2026: सनातन धर्म और खगोल विज्ञान में सूर्य एवं चंद्र ग्रहण का विशेष महत्व माना जाता है। साल 2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण 27 और 28 अगस्त की दरमियानी रात सावन माह की पूर्णिमा तिथि पर लगने जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार यह एक पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा, जिसके दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई देगा। इसी कारण इसे ‘ब्लड मून’ भी कहा जाता है।

कब लगेगा दूसरा चंद्र ग्रहण?

भारतीय समयानुसार यह चंद्र ग्रहण सुबह 06 बजकर 53 मिनट पर शुरू होगा और दोपहर 12 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगा। ग्रहण की कुल अवधि लगभग 5 घंटे 39 मिनट रहेगी। यह ग्रहण कुंभ राशि और शतभिषा नक्षत्र में घटित होगा।

क्यों खास है यह ग्रहण?

खगोल वैज्ञानिकों के अनुसार इस दौरान चंद्रमा का लगभग 93 प्रतिशत हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया से ढक जाएगा। जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है, तब सूर्य का प्रकाश सीधे चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता। पृथ्वी के वायुमंडल से होकर गुजरने वाली सूर्य की किरणें मुड़कर चंद्रमा तक पहुंचती हैं, जिससे चंद्रमा गहरे लाल रंग का दिखाई देता है। इसी घटना को ब्लड मून कहा जाता है।

भारत में क्यों नहीं दिखाई देगा चंद्र ग्रहण?

साल 2026 का यह दूसरा चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। इसकी मुख्य वजह यह है कि ग्रहण के दौरान भारत में दिन का समय होगा। चंद्र ग्रहण केवल रात के समय ही देखा जा सकता है, इसलिए भारतीय आकाश में यह खगोलीय घटना नजर नहीं आएगी।

क्या लगेगा सूतक काल?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण शुरू होने से नौ घंटे पहले आरंभ हो जाता है। हालांकि, शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि सूतक काल तभी मान्य होता है जब ग्रहण संबंधित क्षेत्र में दिखाई देता हो।

चूंकि यह चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए इसका सूतक काल भी देश में मान्य नहीं होगा। ऐसे में पूजा-पाठ, विवाह, गृह प्रवेश और अन्य शुभ एवं मांगलिक कार्यों पर किसी प्रकार की रोक नहीं रहेगी।

किन देशों में दिखाई देगा ब्लड मून?

यह पूर्ण चंद्र ग्रहण दुनिया के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा। खास तौर पर:

  • यूरोप
  • अफ्रीका
  • उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका
  • प्रशांत महासागर क्षेत्र
  • अटलांटिक महासागर क्षेत्र

इन क्षेत्रों में लोग ब्लड मून का दुर्लभ और आकर्षक नजारा देख सकेंगे।

चंद्र ग्रहण का धार्मिक और वैज्ञानिक महत्व

धार्मिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण को विशेष खगोलीय घटना माना जाता है, जबकि वैज्ञानिकों के लिए यह पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा की स्थिति को समझने का महत्वपूर्ण अवसर होता है। ब्लड मून जैसी घटनाएं खगोल प्रेमियों के लिए हमेशा आकर्षण का केंद्र रहती हैं।

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