लाल किले के पास कार ब्लास्ट: हापुड़ से डॉक्टर गिरफ्तार, 18 से अधिक गिरफ्तारियों के बाद जांच तेज़

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास हुई i20 कार धमाके की जांच लगातार तेज़ होती जा रही है। दिल्ली पुलिस और केंद्रीय जांच एजेंसियाँ इस विस्फोट के पीछे काम कर रहे आतंकी मॉड्यूल की परतें खोलने में जुटी हैं। अब तक अलग-अलग राज्यों से 18 से अधिक लोगों की गिरफ्तारियाँ की जा चुकी हैं। इसी सिलसिले में पुलिस ने हापुड़ जिले के पिलखुवा स्थित जीएस मेडिकल कॉलेज से एक डॉक्टर को देर रात हिरासत में लिया है।
सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए डॉक्टर का नाम फारूक अहमद है, जो जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के रहने वाले हैं। बताया जा रहा है कि डॉक्टर फारूक जीएस मेडिकल कॉलेज में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (गायनेकोलॉजी) में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने अपनी एमबीबीएस और एमडी की डिग्री फरीदाबाद की अलफलाह यूनिवर्सिटी से प्राप्त की थी।
दिल्ली पुलिस की एक टीम ने गुरुवार देर रात लगभग 1:30 बजे फारूक अहमद को कॉलेज परिसर से हिरासत में लिया। बताया जा रहा है कि वह 1 अप्रैल 2024 से यहां कार्यरत थे। पुलिस के अनुसार, उनकी गिरफ्तारी दिल्ली धमाके और फरीदाबाद के आतंकी मॉड्यूल से जुड़ी जांच का हिस्सा है।
इससे पहले भी कई डॉक्टरों के इस नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में गिरफ्तारियाँ हो चुकी हैं। सहारनपुर के डॉक्टर आदिल, लखनऊ की डॉक्टर शाहीन शाहिद और कानपुर के एक हृदय रोग विशेषज्ञ को इसी मामले में यूपी एटीएस ने हिरासत में लिया था। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मॉड्यूल एक “व्हाइट-कॉलर टेरर नेटवर्क” के रूप में काम कर रहा था, जिसमें उच्च शिक्षित पेशेवर शामिल थे।
दिल्ली पुलिस और एनआईए फिलहाल इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि इन डॉक्टरों का धमाके की साजिश में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर क्या रोल था। प्रारंभिक जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि विस्फोट में अमोनियम नाइट्रेट और डिटोनेटर का इस्तेमाल किया गया था।
लाल किले के पास हुआ यह धमाका 11 नवंबर की शाम को हुआ था, जब एक Hyundai i20 कार अचानक फट गई। हालांकि, उस समय किसी के हताहत होने की खबर नहीं आई थी, लेकिन इस घटना ने दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था को हिला दिया था।


