बांग्लादेश में छाया नाटक पर हमला, भारतीय सरोदवादक सिराज अली खान सुरक्षित लौटे

बांग्लादेश में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। 19 दिसंबर को होने वाले पारंपरिक छाया नाटक के कार्यक्रम के दौरान भारतीय सरोदवादक सिराज अली खान को अपनी जान बचाकर वहां से भागना पड़ा। सिराज ने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के विरोध प्रदर्शनों और 2024 के छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद स्थिति बेहद असुरक्षित हो गई थी।
सिराज 16 दिसंबर को ढाका पहुंचे थे और 17 दिसंबर को बनानी में एक जैज़ कॉन्सर्ट में प्रस्तुति दी। 19 दिसंबर की सुबह उन्हें पता चला कि जिस इमारत में उनका छाया नाटक कार्यक्रम होना था, उस पर हमला हो गया और वह पूरी तरह नष्ट हो चुकी थी। उन्होंने कहा, “तस्वीरें बहुत डराने वाली थीं।”
ढाका से निकलते समय सिराज को चेकपॉइंट पर रोक लिया गया, जहां उनसे विदेशी मुद्रा के बारे में पूछा गया। डर के कारण उन्होंने अपनी भारतीय पहचान छुपाई और ब्राह्मणों के लहजे में बात की। पासपोर्ट और मोबाइल फोन भी उन्होंने ड्राइवर से छिपाए रखा।
सिराज सुरक्षित कोलकाता लौट आए हैं, लेकिन उनकी मां और तबला वादक अभी भी बांग्लादेश में फंसे हुए हैं। सिराज ने कहा कि बांग्लादेश की भयानक यादें उनके लिए बुरे सपने जैसी बन गई हैं और जब तक हालात सामान्य नहीं होंगे, वह वहां वापस नहीं लौटेंगे।
सिराज ने यह भी कहा कि पहले उनके दादा के पिता के नाम पर बने कॉलेज पर हमला हुआ था, लेकिन इस बार छाया नाटक पर हमला अकल्पनीय और सांस्कृतिक मूल्यों पर हमला माना जा रहा है।



