कुलदीप सिंह सेंगर की सजा निलंबन पर रोक के बाद पीड़ित परिवार की तीखी प्रतिक्रिया

उन्नाव रेप केस में भारतीय जनता पार्टी से निष्कासित नेता और पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट द्वारा दी गई सजा निलंबन के आदेश पर रोक लगा दी है। इसके बाद पीड़ित परिवार की प्रतिक्रिया सामने आई है, जिसमें उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर पीड़िता की मां का बयान
पीड़िता की मां ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा,
“हम सुप्रीम कोर्ट का बहुत-बहुत धन्यवाद करते हैं। हमें न्याय की उम्मीद है। मेरे पति के हत्यारे को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।”
उन्होंने आरोप लगाया कि उनके परिवार की सुरक्षा हटा ली गई है और हाल ही में उनके घर पर गुंडे आए थे, जिसकी रिकॉर्डिंग उनके पास मौजूद है। उन्होंने सरकार से अपने बच्चों और पूरे परिवार को सुरक्षा देने की मांग की।
पीड़िता की मां ने कहा,
“हम खुश हैं कि कोर्ट ने स्टे लगाया। हमारे बच्चों को सुरक्षा और नौकरी मिलनी चाहिए। आप सभी ने हमारे लिए संघर्ष किया है।”
पीड़िता की बहन ने जताई सुरक्षा की चिंता
पीड़िता की बहन ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनके परिवार को अब भी खतरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बहन के खिलाफ झूठी रिकॉर्डिंग फैलाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा,
“ये लोग बाहुबली हैं। हमारे परिवार को इनसे खतरा है। हमें और हमारे भाई को सुरक्षा दी जाए।”
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दिल्ली हाई कोर्ट के 23 दिसंबर के आदेश के बाद भी कुलदीप सिंह सेंगर को हिरासत से रिहा नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई की याचिका में अहम और विचारणीय कानूनी प्रश्न उठाए गए हैं, जिन पर सुनवाई जरूरी है।
CBI की याचिका पर सुनवाई
शीर्ष अदालत ने CBI द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगाई और कुलदीप सिंह सेंगर को नोटिस जारी किया है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 2017 के उन्नाव बलात्कार कांड से जुड़ा है, जिसमें कुलदीप सिंह सेंगर को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। बाद में दिल्ली हाई कोर्ट ने उसकी सजा निलंबित कर दी थी, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने रोक दिया है।
न्याय पर टिकी निगाहें
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को पीड़ित परिवार के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब सभी की निगाहें आने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां इस मामले में आगे की कानूनी दिशा तय होगी।



