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महाराष्ट्र में मेयर पद को लेकर सियासी घमासान, अगले हफ्ते आरक्षण लॉटरी से तय होगी तस्वीर

मुंबई। महाराष्ट्र में नगर निकाय चुनावों के नतीजे आने के बाद मुंबई समेत राज्य की अन्य महानगरपालिकाओं में मेयर पद को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, महाराष्ट्र के नगर विकास विभाग (UD Department) द्वारा बीएमसी और अन्य नगरपालिकाओं के मेयर चुनाव के लिए आरक्षण की लॉटरी निकाली जाएगी। यह लॉटरी अगले सप्ताह मंगलवार या बुधवार को होने की संभावना है।

इस लॉटरी के जरिए यह तय होगा कि संबंधित महानगरपालिका में मेयर किस वर्ग से चुना जाएगा—जनरल, ओबीसी, एससी, एसटी या महिला। उदाहरण के तौर पर, यदि मुंबई मेयर पद के लिए जनरल कैटेगरी की लॉटरी निकलती है, तो उसी वर्ग के निर्वाचित पार्षद को मेयर बनाए जाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। यही व्यवस्था राज्य की अन्य नगरपालिकाओं में भी लागू होगी।

महायुति में खींचतान, ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला चर्चा में
इस बीच खबर है कि शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता बीजेपी से ढाई-ढाई साल के फॉर्मूले पर मेयर पद देने की मांग कर रहे हैं। शनिवार को शिंदे गुट के चुने गए 29 नगरसेवकों ने ताज होटल में इस मुद्दे पर बैठक भी की। हालांकि, अब तक किसी पार्टी ने इस पर खुलकर बयान नहीं दिया है।

मुंबई शिवसेना की प्रवक्ता साइना एनसी ने कहा, “मुंबई का महापौर महायुति का ही रहेगा। हमें उम्मीद है कि एक मराठी महिला को मुंबई का मेयर बनने का मौका मिलेगा। 25 साल बाद महायुति का मेयर बनेगा। मुंबई में अब दो ही ‘भाऊ’ हैं—देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे।”

बीजेपी की तैयारी, विपक्ष के सवाल
सूत्रों के अनुसार, मुंबई में 89 सीटें जीतने के बाद भारतीय जनता पार्टी मेयर पद अपने पास रखने की तैयारी में है। बीजेपी खेमे में इसको लेकर अंदरूनी मंथन तेज है और सभी की निगाहें अब आरक्षण लॉटरी पर टिकी हुई हैं। वहीं, शिवसेना (शिंदे गुट) के मंत्री और नेता भी मेयर पद पर दावा जता रहे हैं।

दूसरी ओर, विपक्ष ने आरक्षण लॉटरी में हो रही देरी पर सवाल उठाए हैं। शिवसेना (यूबीटी) की नेता और पूर्व मेयर किशोरी पेडणेकर ने कहा, “पिछले दो कार्यकाल में बीएमसी में ओपन कैटेगरी महिला के लिए आरक्षण था। यह प्रक्रिया आमतौर पर चुनाव घोषित होने से पहले पूरी हो जाती है। नतीजे आने के बाद भी आरक्षण घोषित क्यों नहीं किया गया?”

बीएमसी की पूर्व मेयर विशाखा राउत ने भी कहा कि नगर विकास विभाग सामान्य तौर पर चुनाव से पहले ही आरक्षण घोषित करता है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।

आरक्षण लॉटरी के बाद साफ होगी स्थिति
राज्य में बीएमसी समेत अन्य नगरपालिकाओं में मेयर पद को लेकर सियासी तस्वीर आरक्षण लॉटरी के ऐलान के बाद ही साफ होगी। तब तक बीजेपी, शिवसेना (शिंदे गुट) और विपक्ष—तीनों की रणनीति इसी एक फैसले पर टिकी रहेगी।

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