अक्षय तृतीया 2026: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और सोना खरीदने का महत्व

नई दिल्ली। हिंदू धर्म में अक्षय तृतीया साल के सबसे शुभ दिनों में गिनी जाती है। इसे अबूझ मुहूर्त भी कहा जाता है, यानी इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए अलग से मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं होती। मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्यों का फल अक्षय यानी कभी खत्म न होने वाला होता है। यही कारण है कि विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय शुरू करना, निवेश या सोना-चांदी खरीदना इस दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
अक्षय तृतीया 2026 की तारीख और समय
पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि का आरंभ 19 अप्रैल को सुबह 10:45 बजे होगा और समाप्ति 20 अप्रैल को सुबह 7:49 बजे होगी। इसलिए अक्षय तृतीया 2026 का पर्व 19 अप्रैल को मनाया जाएगा।
अबूझ मुहूर्त क्यों कहा जाता है?
अक्षय तृतीया को अबूझ मुहूर्त इसलिए कहा जाता है क्योंकि इस दिन ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति अत्यंत शुभ मानी जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य और चंद्रमा दोनों उच्च अवस्था में होते हैं, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। यही कारण है कि इस दिन बिना पंचांग देखे भी शुभ कार्य किए जा सकते हैं।
अक्षय शब्द का अर्थ
‘अक्षय’ का मतलब होता है – जो कभी समाप्त न हो। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए पुण्य कार्य, दान, जप और तप का फल हमेशा बढ़ता रहता है। इसलिए इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है।
पौराणिक मान्यताएं
अक्षय तृतीया से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं:
- इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म हुआ।
- महाभारत की रचना की शुरुआत इसी दिन हुई।
- माता अन्नपूर्णा का प्रकट होना भी इसी दिन माना जाता है।
इन कारणों से यह तिथि धार्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
इस दिन क्या करना चाहिए?
- सुबह स्नान कर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
- जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र, जल और धन का दान करें।
- नया व्यवसाय या निवेश शुरू करना शुभ माना जाता है।
- सोना और चांदी खरीदना विशेष लाभकारी है।
अक्षय तृतीया पर सोना खरीदने की परंपरा
अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन खरीदा गया सोना घर में सुख-समृद्धि लाता है और धन में वृद्धि करता है। इस दिन ज्वेलरी खरीदना भी समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है।



