RBI ने MSMEs के लिए TReDS प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्डिंग नियम आसान बनाने का प्रस्ताव रखा

नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को TReDS (Trade Receivables Discounting System) प्लेटफॉर्म पर छोटे व्यवसायों यानी MSMEs के लिए ऑनबोर्डिंग नियमों को सरल बनाने का प्रस्ताव रखा है। इस कदम का उद्देश्य MSMEs को वर्किंग कैपिटल तक तुरंत पहुंच और व्यापार में आसानी (Ease of Doing Business) सुनिश्चित करना है।
TReDS प्लेटफॉर्म क्या है?
TReDS डिजिटल प्लेटफॉर्म MSMEs को उनके ट्रेड रिसीवेबल्स (इनवॉइस) को डिस्काउंट कराने और बिना किसी गारंटी (collateral) के बैंकों और नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFCs) से तुरंत वर्किंग कैपिटल प्राप्त करने में मदद करता है।
भारत में मुख्य TReDS प्लेटफॉर्म हैं:
- RXIL (Receivables Exchange of India)
- M1xchange (Mynd Solutions)
- Invoicemart
MSMEs को मिली बड़ी राहत
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि MSMEs की TReDS पर भागीदारी बढ़ाने और व्यापार करने में आसानी लाने के लिए प्लेटफॉर्म पर ऑनबोर्डिंग के दौरान ड्यू डिलिजेंस (Due Diligence) की आवश्यकता को खत्म करने का प्रस्ताव है।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि 2014 में पेश किए गए TReDS फ्रेमवर्क और 2023 में बीमा कंपनियों को चौथे प्रतिभागी के रूप में जोड़ने के बाद, मौजूदा निर्देशों की समीक्षा की गई है। मसौदा निर्देश जल्द ही सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किए जाएंगे।
बजट में पहले भी हुई थी घोषणा
वित्त वर्ष 2027 के केंद्रीय बजट में, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रस्ताव रखा था कि सभी CPSEs द्वारा MSMEs से की गई खरीद के लिए TReDS को डिफॉल्ट ट्रांजेक्शन सेटलमेंट प्लेटफॉर्म बनाया जाए। उन्होंने कहा था कि इससे TReDS का पूरा लाभ उठाना संभव होगा और यह अन्य कॉरपोरेट्स के लिए benchmark का काम करेगा।
क्यों जरूरी है यह कदम?
हालांकि TReDS प्लेटफॉर्म कई वर्षों से मौजूद है, MSMEs में डिजिटल अपनाने की कमी और बाजार के बिखराव (fragmentation) के कारण इसका उपयोग अभी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंचा है। RBI और सरकार इस प्लेटफॉर्म के उपयोग को बढ़ाकर MSMEs तक लोन की आसान पहुंच सुनिश्चित करना चाहते हैं।



