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भारत-रूस रक्षा संबंधों में बड़ा कदम, क्या है RELOS समझौता?

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच भारत और रूस के बीच हुए अहम सैन्य समझौते RELOS (Reciprocal Exchange of Logistics Support) को लेकर नई जानकारी सामने आई है।

यह समझौता पिछले वर्ष हुआ था, लेकिन अब इसके प्रावधानों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की गई है।


क्या है RELOS समझौता?

RELOS समझौते के तहत दोनों देश एक-दूसरे के क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत का उपयोग कर सकते हैं।

इसमें शामिल हैं:

  • अधिकतम 3,000 सैनिकों की तैनाती
  • 5 युद्धपोतों की तैनाती
  • 10 सैन्य विमानों की तैनाती

इसका मतलब है कि दोनों देश एक-दूसरे के ठिकानों से सैन्य संचालन कर सकेंगे।


रणनीतिक रूप से क्यों अहम है यह डील?

यह समझौता आर्कटिक क्षेत्र से लेकर हिंद महासागर तक रणनीतिक प्रभाव डाल सकता है।

रूस को जहां हिंद महासागर तक पहुंच मिलेगी, वहीं भारत को आर्कटिक और प्रशांत क्षेत्र में अपनी उपस्थिति बढ़ाने का अवसर मिलेगा।


भारत की सैन्य क्षमता को फायदा

भारत के लिए यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उसकी बड़ी सैन्य क्षमता रूसी उपकरणों पर आधारित है, जिनमें शामिल हैं:

  • Sukhoi Su-30MKI
  • S-400 missile system
  • रूसी मूल की पनडुब्बियां

इससे इनके रखरखाव और संचालन में आसानी होगी।


रूस को क्या फायदा मिलेगा?

रूस को इस समझौते से गर्म पानी वाले बंदरगाहों तक पहुंच मिलेगी।

वह अपने सैन्य उपकरणों को भारत और अंडमान-निकोबार जैसे क्षेत्रों में तैनात कर सकता है, जिससे हिंद महासागर में उसकी रणनीतिक पकड़ मजबूत होगी।


सैन्य और तकनीकी सहयोग बढ़ेगा

इस समझौते से दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल और संयुक्त अभ्यास बढ़ेंगे।

इसके अलावा साइबर सुरक्षा, हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग मजबूत होने की उम्मीद है।


वैश्विक संदेश

विशेषज्ञों के अनुसार यह समझौता बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन का संकेत है। यह न सिर्फ भारत की स्वतंत्र विदेश नीति को मजबूत करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक संदेश भी देता है।


निष्कर्ष

RELOS समझौता भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग को नए स्तर पर ले जाता है। यह दोनों देशों को न केवल सैन्य बल्कि रणनीतिक और आर्थिक रूप से भी मजबूत स्थिति में लाता है।

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