भारतीय सेना का बड़ा कदम: पुराने T-72 टैंकों की जगह आएंगे हाईटेक ‘फ्यूचर रेडी’ कॉम्बैट व्हीकल

नई दिल्ली: वैश्विक सुरक्षा माहौल में बदलाव और सीमावर्ती चुनौतियों के बीच भारतीय सेना अपने बख्तरबंद बेड़े को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रही है। सेना ने ‘प्रोजेक्ट रणजीत’ (Future Ready Combat Vehicle – FRCV) की शुरुआत की है, जिसके तहत पुराने T-72 टैंकों को अत्याधुनिक नए टैंकों से बदला जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, इस परियोजना के तहत करीब 2,200 आधुनिक मेन बैटल टैंक शामिल किए जाने की योजना है। इसे 2024 में मंजूरी मिली थी और इसमें अरबों डॉलर का निवेश किया जा रहा है। लक्ष्य है कि 2030 तक इन टैंकों को चरणबद्ध तरीके से सेना में शामिल कर लिया जाए।
5 दशक पुरानी रीढ़ को मिलेगा रिप्लेसमेंट
सोवियत संघ द्वारा विकसित T-72 टैंक 1970 के दशक से भारतीय सेना की बख्तरबंद ताकत की रीढ़ रहा है। भारत में इसे ‘अजेय’ नाम से शामिल किया गया था और इसका लाइसेंस उत्पादन भी चेन्नई के अवाड़ी में हुआ। हालांकि अब इसे धीरे-धीरे नई पीढ़ी के टैंकों से बदला जा रहा है।
नए टैंकों की खासियत
प्रोजेक्ट रणजीत के तहत विकसित होने वाले नए टैंक आधुनिक युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाए जाएंगे। इनमें कई उन्नत तकनीकें शामिल होंगी:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम
- एक्टिव प्रोटेक्शन सिस्टम (APS)
- ड्रोन इंटीग्रेशन
- उन्नत फायरपावर और सुरक्षा
इन टैंकों को एंटी-टैंक मिसाइल, स्मार्ट हथियार, IED और माइंस जैसे खतरों से निपटने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया जा रहा है।
आत्मनिर्भरता और सुरक्षा को बढ़ावा
इस प्रोजेक्ट में भारतीय कंपनियों की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है। अगले 3 से 4 वर्षों में प्रोटोटाइप तैयार किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इससे न केवल सेना की जमीनी ताकत बढ़ेगी, बल्कि देश की रक्षा आत्मनिर्भरता को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
रणनीतिक महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, इन अत्याधुनिक टैंकों के आने से सीमावर्ती क्षेत्रों में भारत की युद्ध क्षमता और सुरक्षा व्यवस्था काफी मजबूत होगी। यह कदम भविष्य के हाई-टेक युद्धों को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना को पूरी तरह तैयार करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।



