भारत में LPG सप्लाई पर दबाव: आयात में भारी गिरावट

भारत में लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की सप्लाई अप्रैल महीने में दबाव में आ गई है। रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी के मुकाबले आयात लगभग आधा रह गया है, जबकि घरेलू उत्पादन में भी करीब 10% की गिरावट दर्ज की गई है।
LPG आयात में बड़ी गिरावट
1 अप्रैल से 14 अप्रैल के बीच भारत ने औसतन रोजाना करीब 37,000 टन एलपीजी का आयात किया, जबकि फरवरी में यह आंकड़ा लगभग 73,000 टन प्रति दिन था।
भारत अभी भी अपनी आधी से ज्यादा LPG जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है, हालांकि संयुक्त राज्य अमेरिका अब एक प्रमुख सप्लायर बनकर उभरा है।
पश्चिम एशिया संकट का असर
वैश्विक स्तर पर तनाव, खासकर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है।
साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में रुकावटों ने सप्लाई चेन को और कमजोर किया है।
इस वजह से भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ा है।
लंबी अवधि तक संकट बने रहने की आशंका
रिपोर्ट्स के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि प्रभावित सप्लाई को सामान्य होने में कम से कम तीन साल या उससे अधिक समय लग सकता है।
इस दौरान भारत की एलपीजी आयात पर निर्भरता, जो पहले से लगभग 60% है, और भी चुनौतीपूर्ण स्थिति पैदा कर सकती है।
सप्लाई डाइवर्सिफिकेशन की कोशिश
फरवरी में जहां लगभग 90% आयात स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते होता था, वहीं अब यह हिस्सा घटकर करीब 55% रह गया है।
यह बदलाव सप्लाई डाइवर्सिफिकेशन और वैकल्पिक स्रोतों की ओर भारत की कोशिशों को दर्शाता है।
निष्कर्ष
भारत में एलपीजी की सप्लाई फिलहाल वैश्विक तनाव और आपूर्ति बाधाओं के कारण दबाव में है। आने वाले समय में कीमतों और सप्लाई स्थिरता को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है।



