महिला आरक्षण पर AIMIM का सवाल, ‘मुस्लिम-ओबीसी महिलाओं की हिस्सेदारी तय हो’

महिला आरक्षण संशोधन विधेयक को लेकर AIMIM नेता शादाब चौहान का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण का समर्थन तभी सार्थक होगा, जब इसमें दलित, ओबीसी और मुस्लिम महिलाओं की हिस्सेदारी स्पष्ट रूप से तय की जाए।
एबीपी न्यूज़ से बातचीत में शादाब चौहान ने कहा कि महिलाओं का वास्तविक सम्मान तभी होगा जब देश में उनके खिलाफ होने वाले अपराधों पर प्रभावी रोक लगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है और लगातार बढ़ते महिला उत्पीड़न के मामलों पर ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।
“सिर्फ राजनीतिक लाभ नहीं, समान भागीदारी जरूरी”
शादाब चौहान ने कहा कि महिला आरक्षण को केवल राजनीतिक लाभ या प्रचार का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि यह सुनिश्चित होना चाहिए कि आरक्षण का लाभ समाज के सभी वर्गों—खासकर दलित, मुस्लिम और ओबीसी महिलाओं—तक पहुंचे।
ओवैसी ने भी उठाए बड़े सवाल
इस मुद्दे पर AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी लोकसभा में चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण के साथ लाया जा रहा परिसीमन बिल देश के संघीय ढांचे को प्रभावित कर सकता है।
ओवैसी के मुताबिक, परिसीमन से दक्षिण भारत के राज्यों की राजनीतिक ताकत कमजोर हो सकती है, जबकि अधिक आबादी वाले राज्यों को इसका फायदा मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे संसद में कुछ क्षेत्रों की आवाज कमजोर पड़ सकती है।



