उत्तर प्रदेश

मुस्लिम महिला आरक्षण पर बढ़ी बहस,खालिद रशीद फिरंगी महली बोले…

महिला आरक्षण को लेकर देश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण में शामिल करने की मांग के बाद इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया (ईदगाह) के अध्यक्ष खालिद रशीद फिरंगी महली ने सवाल उठाया कि जब संसद में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों के नाम पर कई कानून लाए जाते हैं, तो महिला आरक्षण में उन्हें अलग हिस्सेदारी क्यों नहीं दी जा सकती। उन्होंने इसे न्याय और समान अवसर का मुद्दा बताया।

वहीं समाजवादी पार्टी के नेता एस.टी. हसन ने कहा कि महिला आरक्षण का उद्देश्य सभी वर्गों की महिलाओं को मुख्यधारा में लाना होना चाहिए। उन्होंने “आरक्षण के भीतर आरक्षण” की मांग को दोहराते हुए कहा कि इसमें मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

दूसरी ओर, इस मांग का विरोध भी तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष बबिता सिंह चौहान ने कहा कि महिला आरक्षण को धर्म के आधार पर नहीं बांटा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, “महिलाओं का कोई धर्म या जाति नहीं होती, यह सभी के लिए समान होना चाहिए।”

राज्य मंत्री बेबी रानी मौर्य ने भी सपा पर निशाना साधते हुए कहा कि यह तुष्टीकरण की राजनीति है। उन्होंने कहा कि किसे टिकट देना है यह राजनीतिक दलों का निर्णय है, लेकिन आरक्षण को धर्म के आधार पर बांटना उचित नहीं है।

कुल मिलाकर, महिला आरक्षण विधेयक पर सहमति के बावजूद “आरक्षण के भीतर आरक्षण” और खासतौर पर मुस्लिम महिलाओं की हिस्सेदारी को लेकर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा संसद और सियासत दोनों में और गर्मा सकता है।

Related Articles

Back to top button