यूपी पंचायत चुनाव में देरी तय, वोटर लिस्ट प्रक्रिया लंबी होने से बढ़ा सस्पेंस

उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित पंचायत चुनाव समय पर होने को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। राज्य निर्वाचन आयोग के हालिया पत्र से संकेत मिल रहे हैं कि चुनाव प्रक्रिया में देरी हो सकती है। इससे उन उम्मीदवारों को झटका लगा है जो इस वर्ष होने वाले पंचायत चुनाव की तैयारी में जुटे थे।
जानकारी के अनुसार मौजूदा पंचायत का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी शेड्यूल के मुताबिक मतदाता सूची के पुनरीक्षण और कम्प्यूटरीकरण का काम 28 मई 2026 तक चलेगा। इसके बाद 29 मई से 9 जून 2026 तक मतदान केंद्रों का क्रमांकन, वार्ड मैपिंग, मतदाता सूची का अंतिम स्वरूप तैयार करने और अन्य तकनीकी कार्य किए जाएंगे। वहीं निर्वाचक नामावली का अंतिम प्रकाशन 10 जून 2026 को किया जाएगा।
ऐसे में जब तक अंतिम मतदाता सूची तैयार नहीं हो जाती, तब तक चुनाव प्रक्रिया शुरू होना संभव नहीं माना जा रहा है। इसी वजह से पंचायत चुनाव समय पर होने को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
राज्य निर्वाचन आयुक्त राज प्रताप सिंह द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट किया गया है कि जिला मजिस्ट्रेट, जिला निर्वाचन अधिकारी और संबंधित अधिकारियों को तय समय सीमा में सभी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसके साथ ही यह भी निर्देश दिए गए हैं कि पुनरीक्षण कार्य के दौरान आने वाले सभी सार्वजनिक अवकाशों में भी कार्यालय खुले रहेंगे ताकि काम समय पर पूरा किया जा सके।
इससे पहले प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर भी यह संकेत दे चुके हैं कि पंचायत चुनाव समय पर नहीं हो सकते। उन्होंने इसके लिए विपक्षी दलों को जिम्मेदार बताया था। वहीं पंचायत चुनाव से जुड़ी कुछ याचिकाएं इलाहाबाद हाईकोर्ट में भी लंबित हैं, जिससे प्रक्रिया और जटिल हो गई है।
इन परिस्थितियों को देखते हुए माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव तय समय से आगे खिसक सकते हैं, जिससे चुनावी तैयारियों में जुटे उम्मीदवारों और राजनीतिक दलों की रणनीति पर असर पड़ सकता है।




