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“Cockroach Janta Party” Viral: सोशल मीडिया पर छाया व्यंग्यात्मक राजनीतिक आंदोलन, अकाउंट बैन के बाद फिर लौटा ट्रेंड

सोशल मीडिया पर इन दिनों ‘Cockroach Janta Party’ तेजी से चर्चा में है। Instagram और X (पूर्व Twitter) पर इस नाम से बने अकाउंट्स को लेकर यूजर्स के बीच भारी उत्साह देखा जा रहा है।

Instagram पर 20 मिलियन तक पहुंचे फॉलोअर्स

रिपोर्ट्स के अनुसार, Cockroach Janta Party के Instagram फॉलोअर्स 20 मिलियन तक पहुंच गए हैं। वहीं X पर इसका एक अकाउंट कुछ समय के लिए बैन कर दिया गया था, लेकिन बाद में “Cockroach is Back” नाम से नया हैंडल फिर से सक्रिय हो गया।

नए अकाउंट की टैगलाइन “Cockroaches don’t die!” भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है।

व्यंग्यात्मक संगठन के रूप में शुरुआत

यह एक डिजिटल और व्यंग्यात्मक (satirical) राजनीतिक पहल बताई जा रही है, जिसकी शुरुआत हाल ही में हुई थी। इसके संस्थापक के रूप में Abhijit Dipke का नाम सामने आ रहा है।

CJI टिप्पणी से जुड़कर शुरू हुआ विवाद

इस ट्रेंड की शुरुआत उस बहस के बाद मानी जा रही है जब मुख्य न्यायाधीश से जुड़ी एक कथित टिप्पणी में “कॉकरोच” और “परजीवी” जैसे शब्दों का इस्तेमाल चर्चा में आया था। हालांकि बाद में स्पष्ट किया गया कि बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया था।

इसी विवाद के बाद सोशल मीडिया पर यह डिजिटल आंदोलन तेजी से फैल गया।

नेताओं की मिली-जुली प्रतिक्रिया

इस ट्रेंड पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं।

Shashi Tharoor ने कहा कि युवाओं का इस तरह के डिजिटल आंदोलन से जुड़ना उनकी नाराजगी और राजनीतिक असंतोष को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे अकाउंट्स को बंद करना सही कदम नहीं है।

वहीं Priyanka Chaturvedi ने कहा कि यह ट्रेंड इस बात का संकेत है कि युवा पारंपरिक राजनीतिक दलों से दूरी महसूस कर रहे हैं।

Arjun Singh Chautala ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़ते हुए कहा कि सवाल उठाना लोकतांत्रिक अधिकार है।

‘कॉकरोच बंदी’ तक पहुंची बहस

Deepender Singh Hooda ने व्यंग्य करते हुए इसे “नोटबंदी के बाद कॉकरोच बंदी” जैसा बताया और सोशल मीडिया अकाउंट बैन को लोकतंत्र के लिए गलत संकेत कहा।

युवाओं में डिजिटल राजनीति का नया ट्रेंड

यह पूरा मामला अब एक डिजिटल राजनीतिक व्यंग्य आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है, जिसमें युवा सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी और विचार व्यक्त कर रहे हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह ट्रेंड बताता है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म अब राजनीति और जनभावनाओं को प्रभावित करने का एक बड़ा माध्यम बन चुका है।

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